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Showing posts from July, 2023
  क़िस्मत किसी शहर में, सूरज और श्रीहर्ष नाम के दो भाई रहा करते थे. वे अक्सर अपनी बातें एक दूसरे से साझा करते. दिल्ली के एक कॉलेज में दोनों ने दाखिला लिया था। श्रीहर्ष का रुझान फिल्मों और मीडिया कि तरफ था और वह उसी क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहता था. एक दिन उसने दिल्ली के समाचार पत्र में के एक विज्ञापन देखा. एक नयी फिल्म के मुख्य पात्र के लिए नए लड़कों को ऑडिशन के लिए बुलाया गया था. क्योंकि उस फिल्म के निर्माता को अपनी फिल्म के लिए किसी नए चेहरे की तलाश थी। विज्ञापन को देखकर श्रीहर्ष की बाँछे खिल गयी और उसने ऑडिशन के लिए जाने की योजना बनाई। श्रीहर्ष ने सूरज को कहा – भाई मुझे इस ऑडिशन के लिए जाना है। तुम भी मेरे साथ चलो। सूरज आराम करना चाहता था। उसने जाने से मना कर दिया। श्री हर्ष ने कहा – यदि तुम मेरे साथ चलोगे तो, मैं तुम्हें पिज्जा खिलाऊँगा. सूरज पिज्जा का बहुत शौकीन था. इस ऑफर को वह ठुकरा न सका. श्रीहर्ष के साथ वह ऑडिशन की जगह पर पहुंचा। कम से कम तीन-चार हज़ार प्रतियोगियों की भारी भीड़ जमा थी। श्रीहर्ष अपनी बारी का इंतज़ार कर रहा था। सूरज वही कोने में...

संघ साधनारत तपस्वी

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संघ तपस्वी  संघ विस्तार में ध्येय जीवन समर्पित भावना। दिव्य लक्ष्य तक पहुंचने की अनुपम कामना ।। 1950 में अजमेर संघ शिक्षा वर्ग के बाद प्रांत प्रचारक ने सभी प्रचारकों से कहा कि अब प्रचारक व्यवस्था समाप्त की जा रही है, अतः सब घर वापस लौट जाएँ ! इस सूचना के बाद कुछ प्रचारक गुरूजी से मिले और पूछा कि गुरूजी आप शादी कब कर रहे हैं ? इस प्रश्न से गुरूजी असमंजस में पड गए और बोले कि मैं शादी क्यूं करूँगा भला ? इस पर प्रचारकों ने कहा कि जब आप गृहस्थ नहीं बन सकते तो फिर हमसे यह अपेक्षा क्यों ? सारी स्थिति समझकर गुरूजी ने उन्हें समझाया कि संघ की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वह प्रचारकों के प्रवास व्यय को भी वहन कर सके ! इसके बाद निर्णय हुआ कि जो लोग स्वयं व्यवस्था कर संघ कार्य कर सकते हैं, वे रहें , शेष वापस घर जाएँ ! तभी बाबा साहब नातू और राजाभाऊ महाकाल ने सोनकच्छ में चाय की दूकान चलाई और दिगंबर राव तिजारेजी ने उज्जैन के विनोद मिल में स्वीपर की नौकरी की ! वहीं उनका पहला परिचय हुआ - दत्तात्रय गंगाधर कस्तूरे उपाख्य भैयाजी कस्तूरे से ! माता पिता बचपन में ही चल बसे ! इन्हें व बड़े भाई दिगंबर कस्...