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Showing posts from June, 2021

भारत की गौरवशाली परंपरा

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  भारत की गौरवशाली परंपरा   सांस्कृतिक, वैचारिक, व्यवहारिक व साहित्य वैभव -  सांस्कृतिक वैभव - चार पुरुषार्थ, धर्म, अर्थ, काम मोक्ष, संस्कार व्यवस्था जन्म से मृत्यु तक 16 संस्कारों की व्यवस्था, पूर्व में 40 संस्कारों का वर्णन |  परिवार व्यवस्था संयुक्त परिवार, उसमें प्रत्येक घटक के संपूर्ण विकास की व्यवस्था इसके लिए समर्पण भाव,  आश्रम व्यवस्था - ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ व संयास आश्रम, गुरु शिष्य संबंध परिकल्पना - गुरुकुल व्यवस्था भारतीय जीवन शैली - आत्मा की अमरता, पुनर्जन्म व कर्मफल का सिद्धांत,  आत्मा परमात्मा तथा जीवात्मा -   परस्पर संबंधित हैं, व्यष्टि, समष्टि, सृष्टि, परमेष्ठी |  ऐहिक जीवन  में प्रगति - ऋग्वेद में कृषि संबंधी वर्णन, कृषि क्षेत्र के सभी यंत्रों व तकनीकी प्रक्रियाओं की विस्तृत जानकारी व वर्णन | जैसे हल, सिंचाई, पशुपालन, जैविक खाद आदि |  संसार में हजारों वर्ष पूर्व सर्वप्रथम कृषि अध्ययन भारत में ही प्रारंभ हुआ हजारों वर्ष पूर्व पुराने कृषि पराशर, वृक्ष, आयुर्वेद आदि कृषि ग्रंथ आज भी विश्व स्तरीय शिक्षा में मा...

कहानी संकलन

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कहानी संकलन  क़िस्मत किसी शहर में, सूरज और श्रीहर्ष नाम के दो भाई रहा करते थे. वे अक्सर अपनी बातें एक दूसरे से साझा करते. दिल्ली के एक कॉलेज में दोनों ने दाखिला लिया था। श्रीहर्ष का रुझान फिल्मों और मीडिया कि तरफ था और वह उसी क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहता था. एक दिन उसने दिल्ली के समाचार पत्र में के एक विज्ञापन देखा. एक नयी फिल्म के मुख्य पात्र के लिए नए लड़कों को ऑडिशन के लिए बुलाया गया था. क्योंकि उस फिल्म के निर्माता को अपनी फिल्म के लिए किसी नए चेहरे की तलाश थी। विज्ञापन को देखकर श्रीहर्ष की बाँछे खिल गयी और उसने ऑडिशन के लिए जाने की योजना बनाई। श्रीहर्ष ने सूरज को कहा – भाई मुझे इस ऑडिशन के लिए जाना है। तुम भी मेरे साथ चलो। सूरज आराम करना चाहता था। उसने जाने से मना कर दिया। श्री हर्ष ने कहा – यदि तुम मेरे साथ चलोगे तो, मैं तुम्हें पिज्जा खिलाऊँगा. सूरज पिज्जा का बहुत शौकीन था. इस ऑफर को वह ठुकरा न सका. श्रीहर्ष के साथ वह ऑडिशन की जगह पर पहुंचा। कम से कम तीन-चार हज़ार प्रतियोगियों की भारी भीड़ जमा थी। श्रीहर्ष अपनी बारी का इंतज़ार कर रहा था। सूरज व...

स्वरोजगार - एक विकल्प

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  स्वरोजगार - एक विकल्प                                                   -- देवेन्द्र कुमार शर्मा  आचार्य                                                                       मदन मोहन कलावती सर्राफ सरस्वती विद्या मंदिर, मथुरा बेरोजगारी के आलम में,  स्वरोजगार अपनाना सीखें। स्वयं स्वाबलंबी बन करके, औरों को भी जगाना सीखें।। स्वरोजगार का अर्थ --          स्वयं तथा स्वजनों के पालन पोषण हेतु स्वयं के द्वारा संचालित एवं नियंत्रित जीविकोपार्जन का साधन ही स्वरोजगार कहलाता है।          सामान्यत: सरकार या किसी अन्य व्यक्ति के अधीन रहकर कोई जीविकोपार्जन का सा...