Posts

Showing posts from April, 2022

आलोचना

 आज अपने को आत्ममंथन करने की जरूरत है की कभी राष्ट्रवाद की बड़ी बात करने वाले क्या कभी इस स्तर तक नहीं गिरेंगे की राष्ट्रवाद के विरुद्ध षड्यंत्र करें,बहुत सारे ऐसे नाम ध्यान मे आते है जो भाजपा पार्टी के नेता रहे है, कार्यकर्ता रहे है, समर्थक रहे है लेकिन आज वे भाजपा के खिलाफ ही बोलते/लिखते दिखाई देते है। भाजपा के खिलाफ एजेंडा चलाने वाले लोग चाहे जिस खेमे के हो, वो राष्ट्रवादी तो कतई नहीं हो सकते। क्योंकि भाजपा के खिलाफ लोगों को भड़का कर आप हिंदुत्व या राष्ट्रवाद का भला नहीं कर रहे बल्कि आप ऐसे लोगो को आमंत्रित करके आप राष्ट्रवाद का नुकसान कर रहे है। आप देश को पुनः उस खड्डे में डालने का काम कर रहे है जिससे निकलने में 70 साल से ज्यादा लग गये। इसीलिए जो भी यूट्यूब/फेसबुकिया पत्तलकार/बुद्धिजीवी/ब्रम्हांड ज्ञानी फिर चाहे वो कितना ही बड़का राष्ट्रवादी या हिंदूवादी हो, अगर लगातार भाजपा के खिलाफ समर्थकों को भड़काने का काम कर रहा है, तो वो टूकलिट का हिस्सा हो सकता है या टूलकिटानुओं का काम आसान कर रहा है। राष्ट्रवाद और हिंदुत्व की बात करते हैं और किसी निजी स्वार्थ की पूर्ति न होने पर कु...

परिवार प्रबोधन

 कुटुंब प्रबोधन क्यो जरूरी। आओ विचार करें ---- पश्चिमी दुनिया में फैमिली सिस्टम समाप्त , हिन्दू परिवार परम्परा का भी पतन प्रारम्भ। ---- इस्लाम का मज़बूत फैमिली सिस्टम उसे जिलाये रखने में सक्षम- डेविड सेलबॉर्न पश्चिमी दुनिया का मशहूर लेखक है। उसने एक किताब लिखी है "The losing battle with islam" इस किताब में उसने लिखा है कि पश्चिमी दुनिया इस्लाम से हार रही है।उसने हार के कई कारण गिनाए हैं, जिसमें इस्लाम के मज़बूत फैमिली सिस्टम को एक कारण बताया है।        पश्चिमी दुनिया मे फैमिली सिस्टम तबाह हो चुका है। लोग शादी करना पसंद नहीं करते। समलैंगिकता, अवैध संबंध, लिव इन रिलेशन जैसी कुरीतियों के आम होने से फैमिली सिस्टम टूटता जा रहा है। दिन ब दिन ऐसे बच्चों की तादाद बढ़ती जा रही है जिन्हें मालूम नही होता कि उनके पिता कौन हैं। बूढ़े मां -बाप को घर में रखने को कोई तैयार नही है। ओल्ड ऐज होम में उनका बुढापा गुज़रता है। पश्चिमी समाज में कुछ ऐसे समाजिक परिवर्तन आ चुके हैं जिससे पूरा पश्चिमी समाज तबाह होने के कगार पर पहुंच चुका है।         राजनीतिक दल परिवार को बच...

विदेश मंत्री

 विदेश मंत्री सुब्रमण्यम जयशंकर..... भारत की बौद्धिक क्षमता के प्रतीक.... बड़ी ही विनम्रता से वह अपने अकाट्य तर्कों से अंतरराष्ट्रीय मीडिया को उत्तर देते हैं। उन्होंने अमेरिका और यूरोप को जिस तरह से कटघरे में खड़ा किया, इससे पहले कोई भी ऐसा नहीं कर पाया। एक विदेशी पत्रकार ने उनसे पूछा, भारत जिस तरह से यूक्रेन पर तटस्थ है, अभी यूरोप में जो हो रहा है वह एशिया में भी हो सकता है। विदेश मंत्री ने कहा, ऐसा एशिया के साथ हो नहीं सकता बल्कि हो रहा है।  अमेरिका और यूरोप ने मिलकर 10 वर्षों तक अफगानिस्तान में युद्ध किया। एक लोकतांत्रिक सरकार को छोड़कर भागे। आज एशिया उसको भुगत रहा है। भारत ने तीन अरब डॉलर का निवेश किया था जो डूब गया। दूसरे विदेशी पत्रकार ने पूछा,  सारा विश्व मिलकर रूस पर प्रतिबंध लगा रहा है आप क्यों उसके प्रति नरम बने हुए हैं और उनसे तेल खरीद रहे हैं। इस पर विदेश मंत्री जी ने कहा, जितना देर भारत 1 महीने में रूस से खरीदा है उतना तेल यूरोप रूस से दोपहर बाद तक खरीद लेता है। यह सलाह आप  उनको दें और उनसे ही प्रश्न पूछे। तीसरे विदेशी पत्रकार ने पूछा, भारत में राष्ट्रवा...

पर्यावरण

Image
  क्या आपको पता है कि अगले 40-50 वर्षों बाद हमारी सारी खेती योग्य भूमि बंजर हो जाएंगी? रिसर्च कहता है कि खेती करने के लिए भूमि में मिनिमम 3% ऑर्गेनिक कंटेन्ट होने चाहिए...दुनिया के अलग अलग हिस्सों में यह 1 से लेकर 3% तक है...वहीं भारत में मात्र 0.5% बचा है। प्रति सेकंड विश्व में 1 एकड़ ज़मीन बंजर हो रही है..तो आप इससे गणना कर लीजिए कि हम कितनी तीव्र गति से विनाश की ओर बढ़ रहे हैं... पर्यावरण को हम मनुष्य जितनी हानि पहुंचा सकते थे पहुँचा चुके हैं.. अब प्रकृति हमें नुकसान पहुंचा रही है...आज से सौ वर्ष पहले किसी भी फल में जितने अधिकतम न्यूट्रिशन्स होते थे उसका 10% भी उनमें आज शेष नहीं बचा...आप संतरे को ले लीजिए उसमें पहले यदि 100% न्यूट्रिशन होते थे तो आज मात्र 10% बचा है..मतलब आप आज 100 संतरे खा लीजिये और आज से 100 वर्ष पहले का 1 संतरा बराबर था... दुनिया में जहाँ 52% खेती योग्य भूमि बंजर हो चुकी है तो भारत में यह आंकड़ा 60% है...ऊपर से जंगलों की अंधाधुंध कटाई, नदियों का क्षरण...भूमि से जितने ऑर्गेनिक कंटेंट समाप्त होते जाएंगे भूमि का जलस्तर उतना गिरता जाएगा...जब भूमि में नमी ही नहीं बचेग...

संघ प्रार्थना

Image
 *नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे, त्वया हिन्दुभूमे सुखं वर्धितोऽहम्।* हे प्यार करने वाली मातृभूमि! मैं तुझे सदा (सदैव) नमस्कार करता हूँ। तूने मेरा सुख से पालन-पोषण किया है। *महामङ्गले पुण्यभूमे त्वदर्थे, पतत्वेष कायो नमस्ते नमस्ते॥ १॥* हे महामंगलमयी पुण्यभूमि! तेरे ही कार्य में मेरा यह शरीर अर्पण हो। मैं तुझे नमस्कार करता हूँ। *प्रभो शक्तिमन् हिन्दुराष्ट्राङ्गभूता, इमे सादरं त्वाम नमामो वयम्* *त्वदीयाय कार्याय बध्दा कटीयं, शुभामाशिषम देहि तत्पूर्तये।* हे सर्वशक्तिशाली परमेश्वर! हम हिन्दूराष्ट्र के अंगभूत तुझे आदरसहित प्रणाम करते हैं। तेरे ही कार्य के लिए हमने अपनी कमर कसी है। उसकी पूर्ति के लिए हमें अपना शुभाशीर्वाद दे। *अजय्यां च विश्वस्य देहीश शक्तिम, सुशीलं जगद्येन नम्रं भवेत्,* *श्रुतं चैव यत्कण्टकाकीर्ण मार्गं, स्वयं स्वीकृतं नः सुगं कारयेत्॥ २॥* हे प्रभु! हमें ऐसी शक्ति दे, जिसे विश्व में कभी कोई चुनौती न दे सके, ऐसा शुद्ध चारित्र्य दे जिसके समक्ष सम्पूर्ण विश्व नतमस्तक हो जाये, ऐसा ज्ञान दे कि स्वयं के द्वारा स्वीकृत किया गया यह कंटकाकीर्ण मार्ग सुगम हो जाये। *'समुत्कर्षनिःश्रेय...

एकात्मकता स्त्रोत व म॔त्र

Image
  एकात्मता स्तोत्र ॐ सच्चिदानंदरूपाय नमोऽस्तु परमात्मने                 ज्योतिर्मयस्वरूपाय विश्वमांगल्यमूर्तये        ॥१॥ प्रकृतिः पंचभूतानि ग्रहलोकस्वरास्तथा                 दिशः कालश्च सर्वेषां सदा कुर्वंतु मंगलम्‌    ॥२॥ रत्नाकराधौतपदां हिमालयकिरीटिनीम्‌ ब्रह्मराजर्षिरत्नाढ्याम् वन्दे भारतमातरम्‌ ॥३॥ महेंद्रो मलयः सह्यो देवतात्मा हिमालयः ध्येयो रैवतको विन्ध्यो गिरिश्चारावलिस्तथा ॥४॥ गंगा सरस्वती सिंधु ब्रह्मपुत्राश्च गंदकी कावेरी यमुना रेवा कृष्णा गोदा महानदी ॥५॥ अयोध्या मथुरा माया काशी कांची अवंतिका वैशाली द्वारका ध्येया पुरी तक्शशिला गया ॥६॥ प्रयागः पाटलीपुत्रं विजयानगरं महत्‌ इंद्रप्रस्थं सोमनाथस्तथामृतसरः प्रियम्‌॥७॥ चतुर्वेदाः पुराणानि सर्वोपनिषदस्तथा रामायणं भारतं च गीता षड्दर्शनानि च ॥८॥ जैनागमास्त्रिपिटकः गुरुग्रन्थः सतां गिरः एष ज्ञाननिधिः श्रेष्ठः श्रद्धेयो हृदि सर्वदा॥९॥ अरुन्धत्यनसूय च सावित्री जानकी सती द्रौपदी कन्नगे गार्गी मीरा दुर्गावती तथा ॥१०॥ लक्ष्मी अ...

एकात्मकता म॔त्र

Image
  यं वैदिका मन्त्रदृशः पुराणा इन्द्रं यमं मातरिश्वानमाहुः। वेदन्तिनोऽनिर्वचनियमेकं यं ब्रह्मशब्देन विनिर्दिशन्ति ॥ १ ॥ शैवा यमीशं शिव इत्यवोचन् यं वैष्णवा विष्णुरितिस्तुवन्ति। बुद्धस्तथाऽर्हन्निति बौद्धजैनाः सत् श्री अकालेति च सिक्ख संतः ॥ २॥ शास्तेति केचित् प्रकृतीक कुमारः स्वामीति मातेति पितेति भक्त्या। यं प्रार्थयन्ते जगदीशितारं स एक एव प्रभुरद्वितीयः ॥ ३ ॥ अर्थ:  प्राचीन काल के मन्त्रद्रष्टा ऋषियों ने जिसे इंद्र, यम, मातरिश्वान (वैदिका देवता) कहकर पुकारा और जिस एकअनिर्वचनीय को वेदान्ती ब्रह्म शब्द से निर्देश करते हैं। शैव जिसकी शिव और वैष्णव जिसकी विष्णु कहकर स्तुति करते हैं। बौद्ध और जैन जिसे बुद्ध और अर्हन्त कहते हैं तथा सिक्ख सन्त जिसे सत् श्री अकाल कहकर पुकारते हैं। जिस जगत के स्वामी को कोई शास्ता तो कोई प्रकृति , कोई कुमारस्वामी कहते हैं तो कोई जिसको स्वामी , माता-पिता कहकर भक्तिपूर्वक प्रार्थना करते हैं, वह प्रभु एक ही है और अद्वितीय है अर्थात् उसका कोई जोड़ नहीं है।