आलोचना
आज अपने को आत्ममंथन करने की जरूरत है की कभी राष्ट्रवाद की बड़ी बात करने वाले क्या कभी इस स्तर तक नहीं गिरेंगे की राष्ट्रवाद के विरुद्ध षड्यंत्र करें,बहुत सारे ऐसे नाम ध्यान मे आते है जो भाजपा पार्टी के नेता रहे है, कार्यकर्ता रहे है, समर्थक रहे है लेकिन आज वे भाजपा के खिलाफ ही बोलते/लिखते दिखाई देते है। भाजपा के खिलाफ एजेंडा चलाने वाले लोग चाहे जिस खेमे के हो, वो राष्ट्रवादी तो कतई नहीं हो सकते। क्योंकि भाजपा के खिलाफ लोगों को भड़का कर आप हिंदुत्व या राष्ट्रवाद का भला नहीं कर रहे बल्कि आप ऐसे लोगो को आमंत्रित करके आप राष्ट्रवाद का नुकसान कर रहे है। आप देश को पुनः उस खड्डे में डालने का काम कर रहे है जिससे निकलने में 70 साल से ज्यादा लग गये। इसीलिए जो भी यूट्यूब/फेसबुकिया पत्तलकार/बुद्धिजीवी/ब्रम्हांड ज्ञानी फिर चाहे वो कितना ही बड़का राष्ट्रवादी या हिंदूवादी हो, अगर लगातार भाजपा के खिलाफ समर्थकों को भड़काने का काम कर रहा है, तो वो टूकलिट का हिस्सा हो सकता है या टूलकिटानुओं का काम आसान कर रहा है। राष्ट्रवाद और हिंदुत्व की बात करते हैं और किसी निजी स्वार्थ की पूर्ति न होने पर कुंठित होकर उसी राष्ट्रवाद और हिंदुत्व की पीठ में छुरा घोपने को तैयार बैठे हैं। ये कैसा राष्ट्रवाद है? ये कैसा हिंदुत्व है आपका? 73 वर्षों के अथक प्रयासों के बाद सिर्फ 23 करोड़ हिंदुओं को ही एकजुट कर सकें है हम, 67 साल बाद एक पूर्ण बहुमत की राष्ट्रवादी, हिंदूवादी सरकार चुन सकें है हम। आलोचना करने का मतलब ये नहीं होता की आप समर्थकों को भड़काओ/उकसाओ और जुड़ने से पहले ही नए लोगों को दूसरे खेमे में भेज दो। ये कैसा आचरण है? आलोचना करो कोन रोक रहा है पर अपनी ही नाव मे छेद करने जैसा काम ना करे । आज भारत नई विकास की गाथा लिख रहा है, अगर साथ नही दे सकते तो जो सकारात्मक काम कर सकारात्मक परिणाम लाने का प्रयास कर रहे उनका विरोध करे।
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