आज दिनांक 15/5/22 को विद्यालय में पुस्तक "अनकही कथा (स्वाधीनता संग्राम में पश्चिम उत्तर प्रदेश का योगदान )" का विमोचन कार्यक्रम हुआ | इस पुस्तक के संपादक डॉ प्रदीप कुमार जी एवं सह संपादक श्रीमान सतीश शर्मा जी है | कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि श्री सुरेन्द्र सिंह जी (आई ० ए०एस०कमिश्नर मेरठ डिविजन , मुख्य वक्ता श्रीमान रघुवेंद्र तंवर जी (चेयरमैन आई० सी० एच० आर० नई दिल्ली ), जी के साथ कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉ ए० के० अग्रवाल एवं अतिथि श्री नवीन जी व् सुशील जी ने इस पुस्तक का विमोचन किया |
संघ गीत लक्ष्य तक पहुँचे बिना, पथ में पथिक विश्राम कैसा। लक्ष्य तक अति दूर दुर्गम मार्ग भी हम जानते हैं, किन्तु पथ के कंटकों को हम सुमन ही मानते हैं, जब प्रगति का नाम जीवन, यह अकाल विराम कैसा ।। लक्ष्य तक_______ । धनुष से जो छूटता है बाण कब मग में ठहरता देखते ही देखते वह लक्ष्य को ही वेध करता लक्ष्य प्रेरित बाण हैं हम, ठहरने का काम कैसा।। लक्ष्य तक_______ । बस ही है पथिक जो पथ पर निरन्तर अग्रसर हो, हो सदा गतिशील जिसका लक्ष्य प्रतिक्षण निकटतर हो। हार बैठे जो डगर में पथिक उसका नाम कैसा ।। लक्ष्य तक_______ । बाल रवि की स्वर्ण किरणें निमिष में भू पर पहुँचतीं, कालिमा का नाश करतीं, ज्योति जगमग जगत धरती ज्योति के हम पुंज फिर हमको अमा से भीति कैसा ।। लक्ष्य तक_______ । आज तो अति ही निकट है देख लो वह लक्ष्य अपना, तुम वीर शिवा के वंशज हो तुम वीर शिवा के वंशज हो,फिर रोष तुम्हारा कहाँ गया। बोलो राणा की संतानों,वह जोश तुम्हारा कहाँ गया।। ओ वीर तुम्हारे कदमों से,सारी धरती थर्राती थी सागर का दिल हिल जाता था,पर्वत की धड़कती छाती थी अब चाल में सुस्ती कैसी है,क्यों पाँव हैं डगमग डोल रहे। कुछ ...
पिछले 20 वर्ष में सरकारी नौकरी का महत्व 75% घट गया है, क्योंकि सरकारी और निजी लगभग एक समान हो चुका है.. थोड़ा बहुत अंतर बचा है.. अब अगले 5 साल में 25% महत्व भी खत्म होगा.. (यहां मेरा मतलब सरकारी पद खत्म होने से नहीं है, सरकारी नौकरी का महत्व खत्म होने से है..) आज टेक्नोलॉजी का विस्तार तेजी से हो रहा है, मान लीजिए कल सरकार को किसी दूर दराज के गांव में एक बैंक का ऑफिस खोलने की आवश्यकता थी, यदि ऑफिस खुलता तो 10 लोगों को सरकारी नौकरी मिलती.. अब टेक्नोलॉजी के कारण सरकार को बैंक खोलने की जरूरत नहीं है.. घर बैठे ऑनलाइन अकाउंट खुलेगा, डिजिटल पेमेंट से लेन देन होगा.. इस तरह टेक्नोलॉजी ने 10 सरकारी नौकरी खत्म कर दी.. यही वजह है की मोदी सरकार स्किल इंडिया पर जोर दे रही है, क्योंकि आने वाले समय में आपका स्किल ही आपको रोजगार की गारंटी देगा.. टेक्नोलॉजी ऑफिस कल्चर खत्म कर ही रही है, आज निजी क्षेत्रों में वर्क फ्रॉम होम होने लगा है.. एक न एक दिन अधिकांश ऑफिस कल्चर खत्म हो जायेगा.. सरकार को बस गिने चुने पदों पर भर्ती की आवश्यकता रहेगी जो कंप्यूटर/मोबाइल पर घर बैठकर केवल डाटा फीड करें...
आज अपने को आत्ममंथन करने की जरूरत है की कभी राष्ट्रवाद की बड़ी बात करने वाले क्या कभी इस स्तर तक नहीं गिरेंगे की राष्ट्रवाद के विरुद्ध षड्यंत्र करें,बहुत सारे ऐसे नाम ध्यान मे आते है जो भाजपा पार्टी के नेता रहे है, कार्यकर्ता रहे है, समर्थक रहे है लेकिन आज वे भाजपा के खिलाफ ही बोलते/लिखते दिखाई देते है। भाजपा के खिलाफ एजेंडा चलाने वाले लोग चाहे जिस खेमे के हो, वो राष्ट्रवादी तो कतई नहीं हो सकते। क्योंकि भाजपा के खिलाफ लोगों को भड़का कर आप हिंदुत्व या राष्ट्रवाद का भला नहीं कर रहे बल्कि आप ऐसे लोगो को आमंत्रित करके आप राष्ट्रवाद का नुकसान कर रहे है। आप देश को पुनः उस खड्डे में डालने का काम कर रहे है जिससे निकलने में 70 साल से ज्यादा लग गये। इसीलिए जो भी यूट्यूब/फेसबुकिया पत्तलकार/बुद्धिजीवी/ब्रम्हांड ज्ञानी फिर चाहे वो कितना ही बड़का राष्ट्रवादी या हिंदूवादी हो, अगर लगातार भाजपा के खिलाफ समर्थकों को भड़काने का काम कर रहा है, तो वो टूकलिट का हिस्सा हो सकता है या टूलकिटानुओं का काम आसान कर रहा है। राष्ट्रवाद और हिंदुत्व की बात करते हैं और किसी निजी स्वार्थ की पूर्ति न होने पर कु...
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